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Sunday, February 14, 2021

किसान आंदोलन और स्त्री अपनी सांचाबंद शैली को तोड़ कर आगे आती महिला किसान

-अंजलि सिन्हा 




हर जनांदोलन नयी नयी छवियों का निर्माण करता है। शाहीनबाग आंदोलन ने संविधान की रक्षा के लिए खड़ी हुई अल्पसंख्यक समाजों की दादियों को जहां केन्द्र में ला दिया था, तो वर्तमान शासन के लिए चुनौती बने किसान आन्दोलन ने इसी तरह कई सारी छवियां को लोकप्रिय किया है।

इन्हीं में से एक छवि टैक्टर पर बैठी उस स्त्री  किसान की है, जो आत्मविश्वास से भरपूर न केवल ट्रेकटर चला रही है बल्कि अपनी सहेलियों को टैक्टर चलाने का प्रशिक्षण देने वाली भी है। निश्चित ही यह महज फोटो के लिए खींची तस्वीर नहीं है, इस बार सभी ने इस आन्दोलन में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी को देखा है।

Saturday, February 13, 2021

प्रेम का पालतू हो जाना....

- रूपाली सिन्हा 




"प्रेम व्यक्ति के भीतर एक सक्रिय शक्ति का नाम है। यह वह शक्ति है जो व्यक्ति और दुनिया के बीच 
दीवारों को तोड़ डालती है, उसे दूसरों से जोड़ देती है।"
-एरिक फ्रॉम

प्रेम हमेशा से ही चुनौतीपूर्ण रहा है, इसके तेवर हमेशा से ही बाग़ी रहे हैं। यह हर तरह की सामाजिक
बंदिशों को चुनौती देता रहा है-अमीर- ग़रीब, ऊँच- नीच, छोटा-बड़ा आदि। जब इन चुनौतियों से टकरा कर 
वह सामाजिक नॉर्म्स को तोड़ता है तो उसकी सज़ा भी मुक़र्रर होती है। इतिहास में ऐसे उदाहरण के रूप में 
सोहनी-महिवाल, हीर-रांझा, लैला-मजनूँ दिखाई देते हैं तो आजकल यह ऑनर किलिंग के रूप में दिखता है।
फिल्मों में भी इसका प्रतिबिम्बन दिखता है। आपको 'क़यामत से क़यामत तक', 'एक दूजे के लिए', 'इशकज़ादे' 
याद ही होंगी। मिसाल स्थापित कर यह सबक़ सिखाया जाता है कि नॉर्म्स के ख़िलाफ़ जाओगे तो यही हश्र होगा। 
लेकिन ये सब प्रेम के विद्रोही तेवर थे।