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Wednesday, August 26, 2020

मानसिक स्वास्थ्य- मीटिंग रिपोर्ट

 - पद्मा सिंह 



स्त्री मुक्ति संगठन ने लॉक डाउन के दौरान कुछ  विशेष चर्चाएं आयोजित की  |   हिमानी कुलकर्णी  के द्वारा 3 जुलाई को Socio-political dimension of Mental Helth पर की गयी चर्चा इसी का एक हिस्सा थी | स्त्री मुक्ति संगठन पहले की कार्यशालाओं में  मानसिक स्वास्थ्य पर दो सत्र आयोजित कर चुका है । हिमानी, एक मानसिक स्वास्थ सलाहकार हैं । 

हिमानी ने अपनी इस चर्चा में कुछ बहुत ज़रूरी बातें रेखांकित करते हुए कहा कि मानसिक स्वास्थ्य में सबसे जरूरी बात है कि कुछ भी सही या गलत नही होता है।  कुछ भी राजनीतिक रूप से सही या शुद्ध नहीं होता। आपको जो महसूस हो रहा है वही सही है और जिससे आपको बेहतर नहीं लगता, जैसे बेचैनी, काम में मन न लगना, नींद ना आना, खाना कम या ज्यादा , कमजोरी, घबराहट इत्यादि मानसिक अस्वस्थता के लक्षण हैं। लेकिन महत्वपूर्ण बात यह है कि हम मानसिक स्वास्थ्य को अपने घर की समस्या नही मानते बल्कि इसे हम दूसरों की समस्या समझते हैं। यहाँ, लोग एक प्रकार से अपने को दूसरों से भिन्न महसूस करते हैं और समझते हैं कि मानसिक स्वास्थ्य का क्षेत्र बहुत विस्तृत है। जब आप दूसरों से जुड़ नहीं पाते हैं या अपने मन को संभाल नही पाते | आप दुःखी हैं या अकेला महसूस कर रहे हैं,ये सबकुछ मानसिक स्वास्थ का ही हिस्सा है।  लेकिन सबसे ज़रूरी बात यह है कि इसकी समझ विकसित करना, हममे से कोई भी इस समस्या से गुजर सकता है। यहाँ आप अपनी मानसिक परेशानियों को रूढ़िबद्धता या वर्जना बनाकर अपने खुद का सामना नहीं कर पाते। हम सभी लोग मानसिक स्वास्थ्य के गतिमान और विस्तृत फलक पर कभी ना कभी जरूर होते हैं यहाँ सबसे मुख्य बात यह होगी कि हम यह पहचान पाएं कि कब मदद की आवश्यकता है।

आमतौर पर हम अपने मानसिक स्वास्थ्य के पाँच स्तरों पर होते हैं; 

- ज्यादातर ठीक महसूस करते हैं यानि कि स्वस्थ्य हैं । 
- परिस्थितियां बदलने से सब ठीक हो जायेगा, यहाँ हम कुछ मदद ले रहें होते हैं। 
- मानसिक आघात जिससे अच्छा महसूस नही हो रहा पर मदद से ठीक हो जायेगा। 
- घबराहट महसूस होती, बीमार हैं यानि मदद की अत्यधिक जरूरत है। 
- और पुराने रोग से ग्रसित हैं या क्रोनिक अवस्था है तब पेशेवर व्यक्ति की सहायता की जरूरत है। 
      
इसे अत्यंत सरल तरीके से समझने के लिए हम सर्दी, खांसी, वायरल का उदाहरण  ले सकते हैं, जो हम सबको होता है। वह कभी खुद ठीक हो जाता है या कभी काढ़ा या चाय पीकर और कभी - कभी दवा और एंटीबायोटिक तक की जरूरत होती है। उसी तरह कब तक परिस्थिति का दबाव झेल पा रहे हैं और कहाँ अपनी सीमा के बाहर है, कहाँ दोस्तों से बात करके मदद मिलेगी और कब पेशेवर मदद चाहिये, के स्तर हैं। लेकिन समस्या तो ये आती है कि जब  हम अपने ही अनुभवों को समझ नही पाते और तनाव को वाजिब नही समझते आमतौर पर हमारे आस-पास के लोग "कुछ नही होता" , "खुश रहना चाहिये " , "सकारात्मक सोचिये" जैसी बाते कहते हैं। लेकिन ये सब समस्या का सही समाधान नही है। महिलाओं के मानसिक स्वास्थ्य के कारणों में देह छवि (बॉडी इमेज) जैसे विषय भी हो सकते हैं,"हम कैसे दिखते हैं", जेन्डर (लिंग), लैंगिकता , सम्बन्ध, बच्चे इत्यादी अगर यू कहें तो सामाजिक, राजनैतिक , पारिवारिक या पूरे वातावरण के अनेक कारक प्रतिक्रिया के लिये जिम्मेदार हो सकते हैं | इन सबमें जीवनसाथी के साथ सम्बन्धों का बड़ा क्षेत्र है। इस रिश्ते में दिक्कतों से पैदा हुए मानसिक आघात का भावनात्मक, समाजिक या लैंगिक हिंसा से गहरा रिश्ता है। 

अब हम मानसिक स्वास्थ्य का समाजिक, राजनैतिक फलक देखे तो ये पायेंगे कि हमारे समाज में कौन लोग हैं जो बेहतर स्तिथि में हैं और कौन लोग बेहद कमजोर।
इसे अच्छी तरह समझने के लिये  हिमानी ने कुछ प्रश्नों के जरिये अभ्यास कराया। इस अभ्यास में उच्च शिक्षा, विदेश यात्रा,सामाजिक प्रतिष्ठा, क्रय क्षमता, कार्यक्षेत्र में उपयुक्त पहचान, जीवनसाथी चुनने का अधिकार, सामाजिक और कानूनी सुरक्षा, निर्णय लेने का अधिकार, आमदनी,अंग्रेजी भाषा की की जानकारी, माता पिता की उच्च शिक्षा, और पारिवारिक सहयोग जैसे प्रश्न शामिल थे। यहाँ देखने वाली बात यह थी कि एक व्यक्ति के पास कितने संसाधन है। संसाधनों की कमी का होना, मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करता हैं। उदाहरण के लिये बीमार होने या परेशान होने पर अगर आप बिना तनख्वाह कटाये छुट्टी ले सकते हैं या कोई है जो घर पर जिम्मेदारी उठा सकता है।ऐसी परिस्थिति में आप अलग महसूस करेंगे। पर इसकी उलट स्तिथि आपके मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करती है। 
 
सामाजिक, राजनीतिक, व्यक्तिगत के अलावा अनुवांशिक व सामाजिक कारक भी होते हैं। सामाजिक कारणों में रूढ़िबद्ध धारणा, बचपन का बुरा अनुभव , सम्मान का नुकसान जैसे अनेक कारण हो सकते हैं ।
     
अब थोड़ा उस दिशा की तरफ मुड़ते हैं जहाँ हमे मदद मिलेगी। अच्छे मानसिक स्वास्थ्य के लिये सबसे जरूरी है खुद को मजबूत रखना। 

आमतौर पर,ज्यादातर लोगो को विटामिन बी, आयरन, विटामिन डी की कमी होती है।  जिससे कम ऊर्जा व मन खराब रहना जैसी समस्या हो सकती हैं। वसा और कार्बोहाइड्रेट से सुस्ती छा सकती है। इसलिए मानसिक स्वास्थ्य के लिए शारीरिक स्वास्थ्य का अच्छा होना बेहद जरूरी है। 

चर्चा के अंत में कुछ बहुत जरूरी बातें रेखांकित हुई जैसे कि हमे अपने झोले में कुछ चीजे पहले से रखनी चाहिये, जिसे हम जरूरत पड़ने पर इस्तेमाल कर सके। वो कोई भी कार्य जैसे कि पढ़ना, बागवानी, खेलना, सफाई, खाना बनाना, चित्रकारी, संगीत, दोस्त , साइकलिंग, फिल्में कुछ भी हो सकता है जो आपके लिये काम करता है उसको पहचानना हमारे लिये बेहद जरूरी है। 

हमें उस दिशा या दृष्टिकोण को भी समझना चाहिये जहाँ हम स्वस्थ या खुशी महसूस करते हैं,

हिमानी ने अच्छे मानसिक स्वास्थ्य के लिये बहुत ही खूबसूरत सूत्र दिया, जिसमे - 

1) - एक शारीरिक कार्य शरीर के लिए जिससे शरीर स्वस्थ्य रह सके

2) - एक कार्य दिमाग को सतर्क और स्वस्थ्य रखने के लिए 

 3) - एक कार्य जिससे लोगो से जुड़ें रह सकें

 इन तीनों कार्यों को हमें अपनी दिनचर्या में जरूर शामिल करना चाहिये।
 
औरतो के सन्दर्भ में एक बात और समझने और जोर देने की है, वो है जहाँ हाँ करना है वहीं करें। मतलब ना कहना सीखना होगा। 

अन्त में, हमारी दुनिया और मानसिक स्वास्थ्य पर एक उक्ति से बहुत कुछ समझा जा सकता है, "All development work is metal health work." इससे हम समझ सकते हैं कि व्यक्ति, समाज और व्यवस्था आपस में कितना जुड़ा हुआ है। जब तक ऐसी परिस्थिति बनी हुई है तब तक बतौर संगठन कोई अकेला ना छूटे दोस्तों।

PS- पद्मा सिंह स्त्री मुक्ति संघटन से जुडी हुई है और इलाहबाद मै रहती है. इसी के साथ वो उत्तर प्रदेश मै अन्य सामाजिक और राजनितिक कार्यो से भी लम्बे समय से जुडी हुई है.  

1 comments:

Arpita said...

बहुत ज़रूरी संवाद था.
शुक्रिया इतनी अच्छी रिपोर्ट के लिए.

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