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Sunday, July 5, 2020

Lockdown through Gendered Lens- Prof. Sudha Vasan, Zoom Lecture

स्त्री मुक्ति संगठन की तरफ से "Lockdown through Gendered Lens", विषय पर प्रोफेसर सुधा वासन, समाजशात्र विभाग, दिल्ली विश्वविद्याल, के द्वारा बात चीत राखी गयी. मीटिंग का youtube लिंक निचे दिया गया है. साथ मे ये एक वक्तव्य का सार है।

कोरोना की इस महामारी से जिन घरों ने हमें बचा रखा है, एक औरत के लिए वही घर असुरक्षित है। जिस देश में एक औरत को मर्द की तुलना में हमेशा कम आँका जाता है, जहाँ विभिन्न सामाजिक, राजनीतिक एवं व्यतिगत कारणो से अधिकतर मामलों में औरतों का अपना घर नहीं होता, वह लाक्डाउन जेसी परिस्थिति यह सवाल पेदा करती है कि पुरुषों के बनाए गए समाज और घरों में क्या एक औरत अपने आप को इस बीमारी से बचा सकती है और यदि हाँ तो किस कीमत पर ?

जब औरतों ने अपने घरों से बाहर निकल कर भारतीय अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रो में अपनी जगह बनायी तो यह पाया गया कि  सामज की रूढ़िवादी विचारों ने तब भी उन्हें जकड़ा हुआ था जिसके एक उदाहरण हम महिलाओं और पुरुषों को मिलने वाले वेतन में असमानता के रूप में देख सकते है। महामारी के वक़्त जब डॉक्टर,नर्स  एवं अन्य कर्मचारी इस समस्या से जूझने की पूरी कोशिश कर रहे है, तब भी यह देखा जा सकता है कि औरतें जो अधिकतर निचले स्तर की पोस्ट पर पायी जाती है, उन्हें मिलने वाली सुविधाओं एवं उनके बचाव के लिए ज़रूरी व्यवस्था को अनदेखा किया गया है ।

बाहरी सामज में श्रम शोषण से पीडित औरतें घर में भी एक बराबरी का स्थान नहीं प्राप्त कर पायी। नैशनल कमिशन ओफ़ विमन के मुताबिक़ हर 5 मिनट में एक औरत घरेलू हिंसा का शिकार होती है । लाक्डाउन की परिस्तिथि में जहाँ सरकार द्वारा इस असमानता एवं शोषण से बचने के लिए कोई व्यवस्था नहीं की गयी थी, जहाँ परिवार आर्थिक परेशानियों से घिरा हुआ है, जहाँ माँ अपने बच्चों को खाना नहीं खिला पा रही है, और जहाँ मर्द अपनी तथाकथित  मर्दानगी  का सबूत नहीं दे पा रहे है, वहाँ औरत पर बढ़ रही हिंसा सिर्फ़ इस सामज का असली चेहरा दिखाती है।



1 comments:

Babita said...

Sudha ji very nicly describ on Domestic violence in covid 19

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