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Thursday, June 25, 2020

क्या हम इन्फोडेमिक से भी जूझ रहे हैं ?


-अंजलि सिन्हा

जब यह पैनडेमिक अर्थात महामारी का दौर गुजर जाएगा, कोरोना का भय खतम हो जाएगा या कम हो जाएगा तब सोशल मीडिया का स्वरूप कैसा रह जाएगा ? घर के अन्दर बन्दी के इस समय में सामाजिक रूप से जागरूक लोगों ने इसके बेहतर इस्तेमाल की कोशिश की है। जूम, व्हाटसअप, गूगल मीट, फेसबुक लाइव आदि तमाम माध्यमों से सामाजिक सरोकारों के सवालों पर वेबीनार आयोजित होते रहे हैं तो लोगाों को मानसिक रूप से बीमार नहीं होने देने तथा परस्पर सहयोग आदि का प्रयास लोग इन्हीं माध्यमों से करते रहे हैं। 

Saturday, June 6, 2020

वो किससे डरते है ?

- निधि मिश्रा


बात आज से कुछ आठ-दस साल पहले की है। स्त्री मुक्ति संगठन, दिसंबर में अंबेडकर द्वारा मनुस्मृति दहन दिवस को स्त्री सम्मान दिवस के रूप में मना रहा था। लखनऊ विश्वविद्यालय की पूर्व वाइस चांसलर, रुपरेखा वर्मा जी मुख्य वक्ता थीं।

रुपरेखा जी ने वक्तव्य के शुरू में ही कहा कि मैं निजी स्तर पर पुस्तकों को जलाने से सहमत नहीं हूं, हमें उन विचारों से लड़ना होगा।

किसी वैचारिक प्रतिद्वंद्वी या किसी प्रतिद्वंद्वी विचारधारा से वैचारिक और प्रिंसिपल्ड लड़ाई लड़ने का नैतिक बल अपनी विचारधारा में कंविक्शन और उन विचारों की श्रेष्ठता के व्यहवारिक, वास्तविक और वैज्ञानिक आधारों को गहराई से समझने से आता है।