Pages

Subscribe:

Monday, February 10, 2020

प्रेमः विश्वास से बाज़ार तक


- किरन पांडे 

      वैलेन्टाइन डे आने वाला है और हर तरफ प्यार ही प्यार नजर आने लगा है। प्रेमियों के लिये बाज़ा की हर दुकान नायाब तोहफों से सज चुकी है। प्यार की भावना का किस तरह इज़्हार किया जाना चाहिये या फिर आप अपने प्यार के लिये क्या क्या कर सकते है, इस सब पर पूरा ब्यौरा लेकर बाज़ा आपके सामने प्रस्तुत है। आप अपनी क्षमतानुसार अपने प्यार का सर्टिफिकेट आप अपने साथी को दे सकते हैं। बात है सन् 1996 की जिस दिन किसी ने अपने प्यार का इज़्हार मुझसे किया था। ये महज एक संयोग था पर था बहुत खूबसूरत। क्योंकि इसके पहले मुझे इस दिन के बारे में कुछ भी पता नहीं था। शायद इसलिए कि बाज़ा ने तब तक प्यार की दुनिया में अपनी जगह नहीं बनाई थी। दोस्तों से चर्चा हुई तो पता चला कि ये खास दिन प्यार करने वालों का होता है।




     वैलेन्टाइन डे हमेशा से ही एक tricky दिन रहा है। मुझे वैलेन्टाइन डे की कहानी और अवधारणा दोनों बहुत पसन्द हैं और मैं सेंट वैलेन्टाइन को सलाम करती हूँ। और चाहती हूँ कि समाज में प्रेम की धारा सतत् बहती रहे जिसमें लोगों को खुद से पहले दूसरों का ख्याल रहे। कहते हैं कि ये दिन प्यार करने वालों के इज़्हार का दिन है। सेंट वैलेन्टाइन, जिसके नाम पर यह दिन मनाया जाता है, एक रोमन पुजारी थ और उन्हें प्यार का साथ देने और उसे निभाने के पक्ष में खड़ा होने के लिये मृत्युदंड दिया गया। चूंकि 14 फरवरी को उन्हें दफनाया गया, यह दिन उनकी याद में मनाया जाता है। उस वक्त लोग एक गुलाब, हाथ से बनाया कार्ड एक दूसरे को गिफ्ट किया करते थे और उसमें अपनी सभी भावनाओं को संजोकर अपने प्यार को व्यक्त करते थे। और सच, इससे खूबसूरत एहसास कोई हो ही नहीं सकता।

     प्यार आज भी हम सभी के जीवन का एक महत्वपूर्ण पहलू है जिसके लिये सबसे अहम् है विश्वास। विश्वास है, तो प्यार है। हम बचपन में ऐसे माहौल में रहते हैं जहाँ प्यार करना सिखाया नहीं जाता बल्कि रोजमर्रा की जिन्दगी में घटते घटनाक्रमों से अपने आप सीख जाते हैं। जब हम थोड़े बड़े होते हैं तो फिल्मी दुनिया हमें एक साथी के प्यार से परिचित कराती है और धीरे-धीरे हम उसी के सपने को संजोने लगते हैं और यही सपने हमारे जीवन का मकसद बन जाते हैं। कहानियों वाला, सफेद घोड़े पर बैठा राजकुमार सपने में तो होता है पर सच्चाई के पटल पर आते आते उसकी सूरत धुंधली हो जाती है।

     जब भी हम प्यार का नाम लेते हैं तो हमारे आगे लैला-मजनू, हीर-रांझा, रोमियो-जूलियट के उदाहरण आ जाते हैं और हम यही समझते हैं कि उस समय प्यार का रंग शायद इतना गहरा होता होगा कि लोग एक दूसरे के लिये अपनी जान दे दिया करते थे। आज बदलते वक्त और बाजार में उपलब्ध संसाधनों ने प्यार की परिभाषा को ही बदल दिया है। आज प्यार के व्यवसायीकरण, या सौन्दर्यीकरण के नाम पर पूंजीवाद ने समाज के भावनात्मक पैटर्न को ही बदल दिया है। प्यार अब सिर्फ जज़्बात नहीं रहा बल्कि बाज़ा के हाथों खिलौना बन कर रह गया है। और यह एक बड़ा सवाल है कि आज, जो चलन में है, क्या वह प्यार है?  


वैलेन्टाइन डे का व्यवसायीकरण

     वैलेन्टाइन डे के व्यवसायीकरण को देखते हु बहुत सारे प्रश्न हमारे सामने आ जाते हैं। जिस तरह से इस दिन के लिये मार्केटिंग और प्रचार का तरीका बनाया जाता है, तो ऐसा लगता है कि इस दिवस को मनाने के लिये आपके पास एक साथी का होना बेहद जरूरी है, वरना आपकी जिंदगी में इस की कोई सार्थता ही नहीं रहती। आपको ऐसा साथी चाहिये जिसे आप प्रपोज़ कर सकें, कह सकें कि विल यू बी मा वैलेन्टाइन”, उसके साथ डेटिंग पर जा सके वगैरह वगैरह..। फिल्मों में इसके बढ़ते महत्व ने बाज़ा को और मौका दे दिया है। बड़ी-बड़ी कंपनियाँ इस दिन को आक्रामक रूप से बढ़ावा देती है ताकि सौन्दर्य उत्पादों, चॉकलेट, फूलों और रेस्तराँ के व्यापार में वृद्धि की जा सके। इस परिवर्तन के कारण वस्तुओं के रोमांटिकीकरण नामक एक नई प्रक्रिया का निर्माण हुआ, यह एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसमें वस्तुओं ने प्रेम या रोमांस जैसी भावनाओं का अनुभव करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

इंटरनेट पर प्यार की बातें

     इंटरनेट ने आपके आसपास सबसे बड़ा लव मॉल बनाकर प्रेमालाप में क्रांति ला दी है। आजकल प्यार पाना एक काम माना जाता है और बहुत से लोगों को नहीं लगता है कि वो इस काम को अपने दम पर करने में सक्षम हैं तो वो डेटिंग साइट्स को एक विकल्प के तौर पर देखते हैं। दुनिया में बहुतायत डेटिंग एप्प या साइट्स आपको मिल जाएंगी जो आपकी भावनाओं से मेल खाता रिश्ता खोजने का काम करेगीं। वास्तव में डेटिंग साइटस के उपयोगकर्ता दुकानदारों की तरह व्यवहार करते हैं उनके पास वांछित गुणों और शारीरिक विशेषताओं की एक सूची है जो वे साथी में तलाशते हैं। उपयोगकर्ता के पास खुद को ब्रांड बनाने के लिये कुछ ही वक्त होता है जिसमें अपना अच्छा प्रभाव डालने के चक्कर में ये उपयोगकर्ता कई सारी बातें झूठ लिख डालते हैं। इसलिये इंटरनेट डेटिंग हमेशा उतना फायदेमंद नहीं रह जाता जितना हम सोचते हैं और अक्सर अन्त में चोटिल होते हैं। हम इसमें पैसा, समय और भावनाओं का निवेश तो करते हैं लेकिन फिर भी सही साथी नहीं ढूंढ पाते। कहते हैं ना यह एक आभासी दुनिया है जिसका हकीकत से कोई वास्ता नहीं।

     आज के दौर में सभी को प्रेम की दरकार तो है पर ऐसे प्रेम की जिसमें ना कोई जिम्मेदारी हो ना ही कोई जवाबदेही। प्यार जीवन में महकते हुए बगीचे की वह खुशबू है जो विश्वास और समर्पण पर टिका होता था। पर आज के समय में प्रेम का व्यवसायीकरण प्रेमियों के व्यक्तिगत जीवन में व्यवसायिक और आर्थिक उत्तेजनाओं की घुसपैठ एवं प्रेम संबंधों में मौद्रिक और गैर-मौद्रिक प्रतीकों और वस्तुओं के जुड़ाव की प्रक्रिया है। इस पूर प्रक्रिया में भावनात्मक पक्ष कहीं गहरे आहत होता है। रिश्ते, जोड़-तोड़, फायदा नुकसान के आंकड़ों में उलझ कर दम तोड़ देते हैं। आज सभी सम्भावनाओं के बावजूद लोग शोरगुल का हिस्सा बनकर भी अकेले हैं और तलाशते हैं उस प्यार को जो कभी हीर-रांझा ने किया था...., लैला मजनू ने किया था।

-


2 comments:

Unknown said...

बहुत बढ़िया किरण जी । रोमांटिकीकरण का concept मैंने पहली बार पढ़ा । बहुत उम्दा । अगले ब्लोग की प्रतीक्षा रहेगी ।

Unknown said...

Beautiful narration of both the commercialization and real version of Valentine day.But since last couple of years the commercial aspect has taken over.

Post a Comment