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Thursday, December 27, 2018

निजी ही सार्वजनिक है!

- अंजलि सिन्हा

कुछ मायने में यह दौर अजीबोगरीब है। एक तरफ ‘निजी’ अत्यन्त महत्वपूर्ण होता जा रहा है, उसका दायरा बढ़ता जा रहा है, दूसरी तरफ निजी का सार्वजनिक जीवन में और सार्वजनिक का निजी मामलांे में हस्तक्षेप बढ़ता जा रहा है। देखिये, महेन्द्रसिंह धोनी की पत्नी ने अपना एक निजी फोटो इन्स्टाग्राम पर पोस्ट किया जिसमें धोनी किसी चप्पल की दुकान में पत्नी के सैंडिल का फीता बांध रहे हैं। फिर तो प्रतिक्रियाओं की झड़ी लग गयी। किसी ने मि धोनी को अच्छे पति होने की बधाई दी तो किसी ने दोनों के प्यार की बातें कहीं। कइयों ने धोनी की भर्त्सना की कि उन्हें पत्नी को सीख देनी चाहिए। लोगों ने कहा कि धोनी युवाओं के फैन हैं और इससे गलत संदेश जाता है, आखिर साक्षी ने धोनी से ऐसा बदला किस बात का लिया आदि। बेकार की तारीफ या भर्त्सना में लोगों ने अपना समय गंवाया।

साक्षी ने भी जो किया वह उसी तरह एकदम गैरजरूरी था जैसा कि सोशल मीडिया पर अधिकांश की उपस्थिति दिखती है। आप कहां घुमने गए हैं, किस रेस्तरां में नाश्ता किए हैं, क्या खरीदा है और यहां तक कि निजी लमहों के फोटो भी शेयर करके दुनिया को बताने की जरूरत पड़ती है कि हमारे रिश्ते ठीक चल रहे है। 

पिछले दिनों एक पारिवारिक मित्रा अपनी विदेश यात्रा से लौटे, पति पत्नी की यह पहली /और संभवतः आखरी विदेश/ यात्रा थी, उसके बाद तो अपनी इस यात्रा के दौरान उन्होंने लिए सैकड़ों की तादाद में तस्वीरों को - जिसे वह पहले ही अपने सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों तक पहुंचा चुके थे - एक एक मित्रा तथा उसके परिवारजनों को बुला कर घर पर बुला कर दिखाना उनका एक शगल सा बन गया। उन्हें यह सामान्य बात समझ नहीं आयी कि लोगों को आप के निजी लमहों को बयां करते उन पलों को फिर एक बार देखने में कितनी दिलचस्पी होगी। 

न कोई विचार है, न कोई ऐसा काम धाम जो अन्य के साथ साझा करके समाज में कोई अपना पक्ष तय किया जाए। यदि हर कुछ दिन में आप का प्रोफाइल फोटो नहीं बदला तो मानो भूचाल आने का एहसास होने लगे आप को। समाज को कितनी जरूरत है कि आपके ऐसी उपलब्धियों से वह लाभान्वित हो।  हालांकि हमारे समाज की प्रक्रति में भी यह है कि वह दूसरों के निजी जीवन में अधिक दिलचस्पी लेता है। फिल्मी दुनिया हो या खेल की दुनिया हो उनके बारे में अख़बारों में छपने वाले अलग से पूरे पेज को पढ़ कर आप इस बात को समझ ही सकते हैं। 

हाल के दिनों में कुछ फिल्मी सितारों की शादियां सूर्खियों में रहीं। यह दूसरों के लिए इतना महत्वपूर्ण क्यों है कि किसने कब फेरे लिए, कौनसा देश या किस होटल में परिणय सूत्र में बंधे। एक एक शादियां कई कई दिनों तक ख़बरों में छायी रहीं, उसके बाद शादियों के देश के अलग अलग भागों में रिसेप्शन की ख़बरें भी आती गयीं। 

मुकेश और नीता अम्बानी के बेटी की शादी समारोह का भी यही हाल रहा। यहां तो ‘सदी के महानायक’ से लेकर मि परफेक्शनिस्ट सहित तमाम सितारें जमीं पर उतरे और अम्बानी की बेटी की शादी के समारोह में मेहमानों की अगवानी में खाना परोसते दिखे। और जब उनके इस व्यवहार की सोशल मीडिया में ही जबरदस्त आलोचना हुई, इसका मज़ाक उड़ा तो अभिषेक बच्चन ने बाकायदा अपने इन्स्टाग्राम अकौंट पर किसी फैन के प्रश्न का जवाब देते हुए लिखा कि यह कोई रस्म होती है, जहां लड़की के रिश्तेदार/आत्मीयजन इस भूमिका में आते हैं। पता नहीं फैन ने पलट कर पूछा या नहीं कि जब उनकी बहन की शादी हो रही थी तो क्या मुकेश अनिल अम्बानी की जोड़ी उसी तरह मेहमानों की खातिर में लगी थी ?

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