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Friday, August 24, 2018

मैटरनिटी लीव लम्बी हो या छोटी !


तय करने का आधार क्या हो ?
- अंजलि सिन्हा

पिछले साल सरकार ने मैटरनिटी लीव /प्रसूति अवकाश/ को 12 हफते से बढ़ा कर 26 हफता करने का फैसला लिया था। अब भारत सरकार के श्रम मंत्रालय ने कहा है कि वह एक सर्वेक्षण कराएगी जिसमें यह पता लगाया जाएगा कि मैटरनिटी लीव की अवधि बढ़ाने के कारण महिलाओं पर क्या असर पड़ा है ? बताया जा रहा है कि इसकी रिपोर्ट इसी साल के अन्त तक आएगी और संसद के अगले सत्र में इस पर चर्चा सम्भव है।

Wednesday, August 1, 2018

‘‘क्यों मैं एक नारीवादी नहीं हूं: एक नारीवादी घोषणापत्र’’

पुस्तक परिचय
‘‘क्यों मैं एक नारीवादी नहीं हूं: एक नारीवादी घोषणापत्रा ’’
- अंजलि सिन्हा
( Why I Am Not a Feminist : A Feminist Manifesto, Melville House, Brooklyn and London, February 2017)

जेस्सा क्रिस्पिन (Jessa Crispin) की यह किताब नाम के विपरीत एक खांटी नारीवादी किताब ही है। यह नारीवाद और नारीवादियों की अन्दर से / इनसाइडर के तौर पर/ पड़ताल करती है। सम्भव है कि कहीं कहीं उनके विचार या दृष्टिकोण  से कोई असहमत हो, यह भी हो सकता है कि अमेरिकी समाज की पृष्ठभूमि में लिखी गयी इस पुस्तक की बातें कहीं कहीं अपने सरोकार की न लगें, लेकिन नारीवादी मुहिमों  और प्रयासों की सीमाओं तथा कमजोरियों पर ध्यान आकर्षित करने का काम वह बखूबी करती है। इसे हम नारीवादी आन्दोलन को मजबूत बनाने का प्रयास भी मान सकते हैं। वे सभी जो नारीवाद तथा स्त्राी मुददों से सरोकार रखनेवाले हैं, उन्हें इसे नए सिरेसे समझने सीखने के मकसद से इस किताब पर अवश्य निगाह डालनी चाहिए।

जेस्सा क्रिस्पिन एक आनलाइन पत्रिका ‘‘बुकस्लट’’ ( Bookslut )  और आनलाइन साहित्यिक जर्नल ‘स्पोलिया’ (Spolia ) की सम्पादक हैं। उनकी प्रकाशित किताबों के नाम हैं ‘‘द डेड लेडीज प्रोजेक्ट’ ( The Ladies Project ) और ‘‘द क्रिएटिव टैरट’’( The Creative  Tarrot)  । उनके आलेख तमाम अग्रणी प्रकाशनों में - जिनमें न्यूयॉर्क टाईम्स, द गार्डियन, द वॉशिंग्टन पोस्ट’ आदि शामिल हैं - प्रकाशित हुए हैं। 

किताब अंग्रेजी में हैं, वे सभी जो इसे मंगा कर पढ़ सकते हैं अवश्य पढ़ें, यहां प्रस्तुत है किताब का परिचय। इस पुस्तक में कुल 9 अध्याय हैं उसी क्रम में मैं यहां परिचय दे रही हूं: