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Sunday, March 18, 2018

आम औरत पार्टी


- निघत गाँधी 

अंतराष्ट्रीय कामगर  महिला दिवस 2018 की शुरूआत करते हैं एक ऐसी सोच से जो अभी स्वप्न है इस सोच को हम क्रियेटिव सोच को हम अपने व्यवहार मे लायें। हम ऐसी दुनिया की परिकल्पना करे जहाँ हम सभी , प्रेम सौहार्द के साथ काम कर सके और शांति के साथ बिना किसी सरहद के बंधनो के अपने खूबसूरत एवं समृद्ध दक्षिण एशियाई उपमहाद्वीप मे घूम सके. और हमारी सत्ता की बागडोर होगी आम औरत पार्टी के हाथो..

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हम दक्षिण एशियाई महिलाओ के लिए आवश्यक है तथा ये समय की जरूरत है कि हमे एक आम औरत पार्टी कि क्योकि हमे जरूरत है कि अब हमारे मुद्दे ( जेंडर संबंधित प्रश्न)  तथा उनकी राजनीति पर बात हो . हमे आम औरत पार्टी की जरूरत इसलिए भी है क्योकि मुख्यधारा राजनीति मे स्त्री विमर्श से जुड़े प्रश्न नदारद है. तो दक्षिण एशियाई महिलाओ को ऐसे सभी प्रश्नो के लिए एक साथ आने की जरूरत है जो उनसे जुड़े हुए है. दक्षिण एशियाई महिला पार्टी  वुमन फ्रेंडली( जिनकी प्रमुखता महिला मुद्दे ,जोकि बहुत जरूरी है) हो तथा ऐसी पार्टी हो जिसमे सभी अलट्रनेटिव आवाज़ो के लिए स्थान हो।
हमे आम औरत पार्टी की आवश्यकता विभिन्न मुद्दो के लिए है

स्वास्थय महिलाओ का मुद्दा है।

अर्थव्यवस्था महिलाओ का मुद्दा है।

शांति महिलाओ का मुद्दा है।

हिंसा (किसी भी प्रकार की )महिलाओ का मुद्दा है।

पर्यावरण महिलाओ का मुद्दा है।

समानता महिलाओ का मुद्दा है।

उपरोक्त दर्ज किसी भी मुद्दे पर हमारी मुख्यधारा राजनीति ने हमेशा बहुसंख्यको की नज़रिये से देखा है (जाहिर है पुरूष) इन सभी मुद्दो मे फेमिनिस्ट नजरिया नदारद है , भविष्य मे भी हम उनसे बहुत सुधार की उम्मीद नही करते है कि वो इस ओर ध्यान देंगे। यह सभी पार्टियाँ पितृसत्तामकता को बढ़ावा देने वाली सोच से संचालित होती है अत: जो उंगलियो पर गिनी जा सकने वाली महिलाओ ने इन पार्टियों मे जगह बनाई यदा कदा महिला मुद्दो पर एका दिखाई बेशक बधाई के पात्र है।

अत: हम इस वक्त मे ऐसी पार्टी की संकल्पना करते है जो गैर पितृसत्तामक, गैर पूंजीवादी, गैर हेट्रोसेक्सिट हो ( यनि जिसमे सभी तरह के लैंगिकता यौनिकता के लिए स्थान हो ) यही दक्षिण एशियाई महिला पार्टी की नींव हो। जैसा सबको ज्ञात है कि रुकैया सेखावत ने भी ' सूल्ताना का सपना' की सोच आज से कई दशको पहले ही कर दी थी , अब वो दौर है जब हम इस स्वप्न को मूर्त रूप दे।

हम दक्षिण एशियाई महिलाएं थक चुकी है, उन सभी रोज़ रोज़ की हिंसाओ से जो महिलाओं और अन्य किसी भी तरह के अल्पसंख्यक समूह पर हैं. रेप, बॉडी शेमिंग, यौन शोषण, भावनात्मक शोषण और आर्थिक शोषण हमे तकलीफ देता हैं. घरों में, सायबर स्पेस में  और बाहर रोज़ रोज़ के अपमान और घुटन, मार पीट , हत्या और किसी भी प्रकार की ब्लैक मेलिंग अब दम घोटती हैं.

हम त्रस्त हैं इन पित्रसत्तामक सरकारों से जिनका मकसद युद्ध और हथियार बंदी को बढ़ावा देना हैं. इन्होने बेहद गैर जिम्मेदराना तरीकों से बहुत सारे पैसो और संसाधनों का दोहन युद्ध के नाम पे किया हैं. जाति श्रेष्ठता और धरम के नाम पे होने वाले दंगों से और बिना किसी गुनाह के उनमे जान गवाने से. युद्ध हिंसा इसीलिए महिलाओं का विषय हैं क्योंकि वह प्रत्यक्ष एवं परोक्ष रूप से उन्हें प्रभावित करता रहा हैं अतः हम युद्ध नहीं शांति चाहते हैं. हम सुरक्षा चाहतें हैं. हम नहीं चाहते की अमूल्य संसाधन युद्ध आदि पे खर्चा हो बल्कि उन संसाधनों का उपयोग समाज को शिक्षित करने, स्वास्थय तथा समावेशी विकास पे खर्चा हों ताकि सभी स्त्री एवं पुरुष चाहे वो जिस भी जेंडर एवं ओरियेंटशन के हों वह एक सुन्दर जीवन की और अग्रसर हों.

हम ऐसे दक्षिण एशिया की परिकल्पना करतें हैं जो सरहदों से मुक्त हों. हम नहीं चाहते की हमारे लोगों और संसाधनों को सरहद बचने में जाया होना पड़ें. हम चाहते हैं की पुरुष के पुरुषत्व और ईगो को संतुष्ट करने वाले युद्ध और हथियारबंदी और सरहदों की रक्षा बंद हों, जिसपर हम अपना वर्तमान और भविष्य ख़राब करें. उन सभी पैसों का संसाधनों का इस्तेमाल जिंदगियों को खूबसूरत करने वाली चीजें जैसे लाइब्रेरी, पार्क , कम्युनिटी किचन खेतों और किसानो पे हों.

समानता महिलाओं का विषय हैं. हम महिलाएं ऐसे समाज की परिकल्पना करते हैं जो तमाम तरह के ऊंच नीच से परे हों जो समता मूलक हो. हमे बे सर पैर की प्रतियोगिता नहीं चाहिये. हम चाहते हैं की दक्षिण एशिया के समृद्ध संसाधनों को दुनिया के सबसे आखिरी व्यक्ति तक पहुचाया जाये. हमारे सामने जो सबसे अधिक संसाधन विहीन हैं वो हैं महिलाएं और बच्चे अतः संसाधनों का वितरण इस प्रकार से हो की उनके जीवन में सुधार सके. तथा वे अपने अताम्सम्मान के साथ अपना जीवन जी सके.

हम, ऐसे दक्षिण एशिया की कल्पना करते हैं जो गैर हेट्रो-सेक्सिस्ट हो तथा गैर पूंजीवादी हों ताकि जंगलों नदियों पहाड़ों का दोहन कम से कम हों.

हम महिलाएं तय करेंगी की हमारी इज्ज़त कहाँ हैं. हमारी इज्ज़त हमारी योनियों में नहीं रहती हैं. और किसी भी पुरुष को उसपर बोलने तक का अधिकार नहीं होना चाहिए. महिलाओं की इज्ज़त को उनकी योनियों से जोड़ने वाला शिगूफा पूरी तरह से पित्रसत्तामक समाज की देन हैं अत पुरषों को इससे दूर रहना ही उचित होगा. ये महिलाएं तय करेंगी की एक अप्रत्याशीत और बिना उनकी मर्ज़ी के उनके योनियो में डालें गए लिंग को वो क्या कहेगी और वह उनके जीवन को कैसे प्रभावित करेगा? इसे वह इरिटेसन कहेंगी , तकलीफ कहेंगी या केवल दुर्घटना. हमारी इज्जत हमारे काम काज , हमारी राजनीती, हमारें मूल्यों और विश्वासों में हैं . उन रिश्तों में हैं जिन्हें हमने बनाया हैं.

हम महिलाएं चाहतें हैं की गरीबी का स्त्रीकरण बंद हों, ताकि हम बेहतर समाज की ओर बढ़ सकें. बल्कि राजनीति का स्त्रीकरण हों. जिसके लिए हमे अपने फेमिनिस्ट सहयोगियों की आवश्यकता हैं, अतः दक्षिण एशिया आम औरत पार्टी की सदस्यता केवल बायोलॉजिकल महिला मात्र तक सिमित नहीं बल्कि ये उन सभी लोगों के लिए हैं जो पित्रसत्ता, पूंजीवाद, और हेटेरोनोर्मतिविटी के खिलाफ हैं. जो समता मूलक समाज के साथ हैं और जिन्हें महिला नेतृत्व से आपत्ति नहीं हों, पर फ़िलहाल ये मात्र एक कल्पना हैं, पर भी हम कल्पना की शक्ति को नकार नहो सकते हैं. हमे विश्वाश रखना होगा तथा इस दिशा में कदम उठाने होंगे जिसे हम सुन्दर बदलाव कहतें हैं.

तो आयें और इस अंतर्राष्ट्रीय कामगार महिला दिवस के अवसर पर नयी उर्जा के साथ नए सपने के साथ और दक्षिण एशिया आम औरत पार्टी की कल्पना के साथ मनाएं.




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