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Wednesday, February 15, 2017

प्रेम के लिए क्रांति और क्रांति के लिए प्रेम



प्रेम के विविध रंग!




एक तरफ बाज़ार, प्रेम को हीरे-मोतियों में तोल रहा है, चाकलेट में घोल रहा है। दूसरी तरफ प्रतिगामी,क्षुद्र और संकीर्ण ताकतें प्रेम से डरा रहीं हैं :- जिहाद के नाम पर, इज़्ज़त के नाम, संस्कृति और धर्म को बचाने के नाम पर !! ऐसे में प्रेम करना किसी युद्ध से कम नहीं।