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Monday, March 7, 2016

8 मार्च, अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस, इलाहाबाद विश्वविद्यालय की छात्राओं के नाम बधाई संदेश और चन्द बातें

दोस्तों,
      आप इस 8 मार्च को बधाई के पहले हकदार है क्योंकि इतिहास इस वर्ष इलाहाबाद छात्रसंघ भवन पर 1 अक्टूबर, 2015 को, आपके द्वारा रचा गया, ये इतिहास ऋचा के साहस, संकल्प, जुझारू व्यक्तित्व और आपकी एकजुटता के संगम का परिणाम है। आज आपका विश्वविद्यालय ही नही, पूरे देश के विश्वविद्यालय इस कठिन दौर में, आपके द्वारा लायी गयी, “नयी रोशनी” की तरफ बड़ी उम्मीद से देख रहे है। आपको इस रोशनी को मद्धिम नही पड़ने देना है, बल्कि इस अंधेरे दौर में जब छात्र अपने स्पेस, एकेडमिक माहौल और अभिव्यक्ति की आजादी के लिए संघर्षरत हैं, आपकी ये नयी रोशनी, ‘मशाल’ बन कर, अंधेरे के खिलाफ खड़ी रहे, यही आशा है।
      8 मार्च इसी संकल्प का दिन है- जब तक धरती पर अन्याय और गैरबराबरी है तब तक हमारे एक जुट होने की ज़रूरत बाकी है।

      


      आपने अपनी इसी एकजुटता से 23 फरवरी को भी, छेड़खानी और हिंसा का जैसे विरोध किया, उससे यह सिद्ध कर दिया है कि आप लड़ सकते है, अपनी लड़ाई। छात्रसंघ अध्यक्ष लड़की चुन कर, एक संदेश आपने दिया है कि छात्रसंघ गुन्डागर्दी और लड़कों की जगह ही नहीं, वो आमछात्रों की जगह है और आम छात्र लड़के ही नहीं, लड़कियाँ भी हैं। उनका बराबर का हक है। लेकिन दोस्तो छेड़खानी और हिंसा से मुक्त वातावरण या भयमुक्त समाज का सपना, ‘एक से नहीं एकता’ से ही होगा। ‘इतिहास रचने  से सिर्फ नहीं, इतिहास की धारा को पलटने से बात बनेगी। युनियन पर एक बार, एक लड़की नही, बार-बार हर जगह अनेक लड़कियों की हिस्सेदारी सुनिश्चित करनी होगी। ये काम व्यक्तिगत, वीरता और साहस से ही सिर्फ नहीं होता। आपमें अनेक साहसी छात्राएं है, अगर आप साहसी नही होती, तो घर की दहलीज से यहाँ छात्रावास में ही नहीं होती। विशेष कर ऐसे माहौल में- जब प्रेम के नाम पर, अंधेरे के नाम पर, छेड़खानी के नाम पर, सुरक्षा के नाम पर, पिजड़े तैयार हैं। लेकिन आपने लक्ष्मण रेखा भी पार की और ‘पिजड़ा’ भी तोड़ा, यहाँ से लेकर, देश की राजधानी तक।
      इस 8 मार्च, हम अपने नौजवान छात्राओं के साहस को सलाम करते हैं। हम अपनी प्रथम क्रांतिकारी, विरासत सावित्रीबाई फूले जी को नमन करते है कि आपने पहला लड़कियों का स्कूल खोला, और सपना देखा था। आज उसका परिणाम दिखायी दे रहा है। आज 21वी सदी में लड़कियाँ पढ़ ही नही रही बल्कि हर तरफ आगे बढ़ रही है।
      आप, आगे बढ़े, नयी-नयी ऊँचाईयाँ प्राप्त करे, लेकिन कुछ मिनट रूक कर- रोहित वेमुल्ला के संस्थागत मर्डर (Institutional Murder)  और निर्भया/ दामिनी या ज्योति सिंह की 16 दिसम्बर को 8.30 बजे की रात्रि की जब वो अपने प्रिय दोस्त जिसे जीवन साथी बनाने वाली थी के साथ हुआ जाघन्य अपराध। ये अपवाद नही है दोस्तो,  छोटी-छोटी हुई घटना पर एक बार फिर सोचे, स्त्री विरोधी (Misogynist) घटनाएं रोज होती है। विशेषरूप से जब लड़कियाँ पिजड़ा तोड़ती है, और बोलती है तो जो दमन (backlash)  होता है कि तुम्हारी सही जगह बता देगे। तुम याज्ञवल्क के काल से - गार्गी तुमने अब प्रश्न किया, तो तुम्हारा गला काट देगे। ये धमकियाँ, चेतावनियाँ अभी भी माहौल में है, इससे क्या अकेले निपट सकते हैं ? दोस्तो आधुनिक भारत के निर्माता, समाज सुधारक, संविधान निर्माता बाबा साहब भीमराव अम्बेदकर के शब्दों में शिक्षित हो और संगठित हो।। हमें अपना मंत्र बनाना ही पड़ेगा।
      समाज संगठित हुए बिना नही बदलता, अकेले आप कुछ कर जरूर कर सकते है, लेकिन समाज नही बदल सकते। आपमें से जिन्हें लगता है, समाज-परिवार में पितृसत्ता, लाचारी, गरीबी, बीमारी, बेईमानी, भाई-भतीजाबाद, धर्म और जाति की उन्मादी राजनीति और दंगे, पूँजीवादी अर्थनीति और मँहगाई, व्यक्तिवाद व अहम्, गला-काँट प्रतियोगिता, सुन्दरता के माँडल जैसे मापदंड और फेयरलवली का वर्चस्व हमारे समाज के कुछ लाइलाज होती बीमारियाँ बन रही है और आप अगर इन बीमारियों से मुक्त और स्वस्थ है तो हम आपको बधाई देते हैं। लेकिन ये आपके किसी अपने को बीमार, डिप्रेस या तनाव ग्रस्त न कर दे या आपके समुचे समाज को। आइये, इससे पहले हाथ बड़ाईये और बदल दे ये दुनियाँ।
      अन्त में, हम सभी स्त्री मुक्ति संगठन के साथी भी इसी दिशा में प्रयासरत है। हमारे कदम छोटे हैं और कई बार डगमगाते भी है। शायद आपके साथ से मजबूत और सार्थक बन सकते हैं।
      इसी विश्वास के साथ और 8 मार्च, अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस की विरासत को आगे बढ़ाने के संकल्प के साथ----------------------------

                                स्त्री मुक्ति संगठन
(हमारा संपर्क—9415636106, 9415348234, 9415580935, 9984919086, 9389694761


सूचना / Programme
दोस्तो 8 मार्च पर, सभी संगठनो का साझा आजादी मार्च (पितृसत्ता से आजादी जाति से आजादी, गरीबी और छेड़खानी से आजादी)
जुलूस अपराह्न 02 बजे दिन, प्रयाग संगीत समिति के सामने (महादेवी जी की प्रतिमा) से आगे यूनियन हाल तक जायेगा। आप सभी अवश्य सम्मिलित हो। 

1 comments:

Beenu Kabir said...

इतने अच्छे लेख के लिए बधाई |

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