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Saturday, March 26, 2016

पुस्तक परिचय : रोज़ वाली स्त्री (लेखिका -सपना चमड़िया)

  -रूपाली सिन्हा             

संभव प्रकाशन से सन 2016 में प्रकाशित डायरीनुमा किताब "रोज़ वाली स्त्री" भारतीय मध्यवर्ग की औरत के जीवन का लेखा-जोखा, मूल्यांकन-विश्लेषण पेश करती है। दूसरे शब्दों में कहें तो वर्ग,जाति,संप्रदाय,समुदाय से परे यह हर उस औरत की डायरी है जो पितृसत्ता के जुए के तले दबी हुई है। लेखिका सपना चमड़िया ने बहुत ही बारीकी से पितृसत्ता के इन बारीक धागों को पकड़ा है जो अक्सर परिवार और रिश्तों के महिमामंडन की चकाचौंध में दिखाई नहीं देते। डायरी की औरतें हमारे-आपके आसपास की हैं जिनसे हम रोज़ रूबरू होते हैं। बकौल लेखिका,"डायरी के ये पात्र ज़िन्दगी से उठाये गए हैं,न तो एक भी पात्र झूठा है न ही कोई घटना।" इस दृष्टि कह सकते हैं कि यह डायरी लेखिका की "आँखिन देखी" प्रस्तुति है।  ये सारी औरतें घुट रही हैं, मुक्ति के लिए छटपटा रही हैं, सवाल खड़े कर रही हैं,जीवन को निरख रही हैं,समझ रही हैं.......खुद लेखिका के शब्दों में "समाज की स्त्रियों की ऐसे किस्सों से बनी हुई यह डायरी है जिसमे हर स्त्री अपनी पहचान कर लेती है।  वह खुद को वहां उपस्थित महसूस करती है। वह उसपर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए राहत की लम्बी साँस लेती है। उसे एक ताज़ी हवा का एहसास होता है। मज़े की बात,उस स्त्री को उन्हें भी सुंनना अच्छा लगता है जोकि उसके मन की गहराई के उस कोने तक नहीं पहुँच पाते हैं,खुद उसके साथ घर में दिन-रात रहते हुए,कहते-पीते,सोते हुए। "  डायरी की इन औरतों के भीतर कुछ कसमसा रहा है,कुछ टूट रहा है,कुछ जुड़ रहा है, कुछ पनप रहा है। यहाँ अपनी ज़मीन अपना आसमान तलाशने की शुरुआत हो चुकी है।  मशहूर शायर मजाज़ के शब्दों में कहें तो :

कुछ नहीं तो कम से कम ख्वाब-ए- सहर देखा तो है 
जिस तरफ देखा न था अब उस तरफ देखा तो है   

Saturday, March 12, 2016

INDIA TODAY CONCLAVE SESSION ON SPIRITUALITY – HALO OR HOAX

-SPEECH: JAVED AKHTAR

I am quite sure ladies and gentlemen, that in this august assembly nobody would envy my position at this moment. Speaking after such a charismatic and formidable personality like Sri Sri Ravi Shankar is like coming out of the pavilion to play after Tendulkar has made a sparkling century. But in some weak moment I had committed myself.

Monday, March 7, 2016

आठ मार्च - अन्तरराष्टीय महिला दिवस: अन्याय के खिलाफ आवाज़ बुलन्द करने का दिन


-अंजलि सिन्हा

दुनिया भर की शोषित-पीड़ित महिलाओं की मुक्ति का उत्सव आठ मार्च ‘अन्तरराष्ट्रीय महिला दिवस’ समूची दुनिया में धूूमधाम से मनाया जाता है। आज के दिन दुनिया के तमाम छोटे-बड़े शहरों, नगरों, कस्बों में महिलाएं सड़कों पर उतरती है, रैलियां करती हैं, सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन करती हैं और स्त्राी मुक्ति के अधूरे संघर्ष को पूरा करने का अपना संकल्प दोहराती हैं।
गौर करने की जरूरत है कि इस दिन का ऐतिहासिक महत्व क्या है।

8 मार्च, अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस, इलाहाबाद विश्वविद्यालय की छात्राओं के नाम बधाई संदेश और चन्द बातें

दोस्तों,
      आप इस 8 मार्च को बधाई के पहले हकदार है क्योंकि इतिहास इस वर्ष इलाहाबाद छात्रसंघ भवन पर 1 अक्टूबर, 2015 को, आपके द्वारा रचा गया, ये इतिहास ऋचा के साहस, संकल्प, जुझारू व्यक्तित्व और आपकी एकजुटता के संगम का परिणाम है। आज आपका विश्वविद्यालय ही नही, पूरे देश के विश्वविद्यालय इस कठिन दौर में, आपके द्वारा लायी गयी, “नयी रोशनी” की तरफ बड़ी उम्मीद से देख रहे है। आपको इस रोशनी को मद्धिम नही पड़ने देना है, बल्कि इस अंधेरे दौर में जब छात्र अपने स्पेस, एकेडमिक माहौल और अभिव्यक्ति की आजादी के लिए संघर्षरत हैं, आपकी ये नयी रोशनी, ‘मशाल’ बन कर, अंधेरे के खिलाफ खड़ी रहे, यही आशा है।
      8 मार्च इसी संकल्प का दिन है- जब तक धरती पर अन्याय और गैरबराबरी है तब तक हमारे एक जुट होने की ज़रूरत बाकी है।