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Sunday, March 29, 2020

साठ पार के बाद

 - अंजलि सिन्हा

कुछ साल पहले मैंने एक लेख लिखा था ‘‘40 पार के बाद’’ जो स्त्राी मुक्ति संगठन की पुस्तिका ‘दासी गृहलक्ष्मी’ में ‘जब बच्चे बड़े हो गए’ नाम से छपा था। यह लेख ऐसी महिलाओं को ध्यान में रख कर लिखा गया था जो जिन्दगी के लगभग चार दशक बीत जाने के बाद की वास्तविकता से रूबरू कराता था। 40 पार कर जाने के बाद महिलाओं की आबादी के एक बड़े हिस्से की जिन्दगी में ऐसा दौर आता है जब उसे खालीपन का एहसास होता है। यह उन महिलाओं के सन्दर्भ में था जो शादी घर गृहस्थी और बच्चों में स्वयं को पूरी तरह झांेक देती हें। 40 के आसपास आते आते बच्चे बड़े हो गए होते हैं, वे खुद को सम्भालने लायक हो गए होते हैं या उस प्रक्रिया में होते हैं। कभी कभी वे चाहते भी नहीं कि माता पिता बच्चों की तरह उनका खयाल करें अथवा उनके सिर पर सवार रहें। इस दौर के भीतर औरत अपना नया कोई कौशल या रूचि भी विकसित नहीं कर पाती। शादी से पहले के दोस्तों -मित्रों का सर्किल छूट गया होता है या औपचारिक रूप ले लिया होता है। नए रिश्तेदार तो होते हैं जिन्हें दोस्त का दर्जा आम तौर पर नहीं दिया जा सकता है। उम्र के इस पड़ाव पर अपने लिए कोई नया उद्यम ढंूढ पाना भी कोई आसान बात नहीं होती है। और तब यही समय तनाव का कारण बनता है क्योंकि अब के समय में नाते-रिश्तेदार भी नहीं मिलते। कुछ लोग तनाव को मैनेज भी कर लेते हैं लेकिर तब वे समय को बीताने ‘‘काटने’’ लगते हैं।

Monday, February 10, 2020

प्रेमः विश्वास से बाज़ार तक


- किरन पांडे 

      वैलेन्टाइन डे आने वाला है और हर तरफ प्यार ही प्यार नजर आने लगा है। प्रेमियों के लिये बाज़ा की हर दुकान नायाब तोहफों से सज चुकी है। प्यार की भावना का किस तरह इज़्हार किया जाना चाहिये या फिर आप अपने प्यार के लिये क्या क्या कर सकते है, इस सब पर पूरा ब्यौरा लेकर बाज़ा आपके सामने प्रस्तुत है। आप अपनी क्षमतानुसार अपने प्यार का सर्टिफिकेट आप अपने साथी को दे सकते हैं। बात है सन् 1996 की जिस दिन किसी ने अपने प्यार का इज़्हार मुझसे किया था। ये महज एक संयोग था पर था बहुत खूबसूरत। क्योंकि इसके पहले मुझे इस दिन के बारे में कुछ भी पता नहीं था। शायद इसलिए कि बाज़ा ने तब तक प्यार की दुनिया में अपनी जगह नहीं बनाई थी। दोस्तों से चर्चा हुई तो पता चला कि ये खास दिन प्यार करने वालों का होता है।




Thursday, December 12, 2019

कब माना जाए कि न्याय मिला ?

Sunday, December 8, 2019

किस तरफ बढ़ता जा रहा है हमारा समाज ?

- अंजलि सिन्हा

अभी हम सभी हैदराबाद की वेटरनरी डॉक्टर के साथ बलात्कार और हत्या के बर्बर घटना को लेकर क्षुब्ध थे कि उन्नाव की एक दूसरी बलात्कार पीड़िता ने सफदरजंग अस्पताल में / 6 दिसम्बर की रात/ को दम तोड़ दिया। ज्ञात हो कि उसके साथ बलात्कार को अंजाम देने वाले आरोपी जेल से पैरोल पर रिहा होकर बाहर आए थे और उन पांचों ने उस लड़की को जिन्दा जला दिया था जिसमें वह 90 फीसदी झुलस गयी थी।


Tuesday, November 26, 2019

D Voter, De-Nesting and Despair: The ‘D Company’ of Assam

-          Shah Alam Khan

On the chars, the river islands of the Brahmaputra in Assam, a snapshot of what life in 'new India' looks like.