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Thursday, December 12, 2019

कब माना जाए कि न्याय मिला ?

Sunday, December 8, 2019

किस तरफ बढ़ता जा रहा है हमारा समाज ?

- अंजलि सिन्हा

अभी हम सभी हैदराबाद की वेटरनरी डॉक्टर के साथ बलात्कार और हत्या के बर्बर घटना को लेकर क्षुब्ध थे कि उन्नाव की एक दूसरी बलात्कार पीड़िता ने सफदरजंग अस्पताल में / 6 दिसम्बर की रात/ को दम तोड़ दिया। ज्ञात हो कि उसके साथ बलात्कार को अंजाम देने वाले आरोपी जेल से पैरोल पर रिहा होकर बाहर आए थे और उन पांचों ने उस लड़की को जिन्दा जला दिया था जिसमें वह 90 फीसदी झुलस गयी थी।


Tuesday, November 26, 2019

D Voter, De-Nesting and Despair: The ‘D Company’ of Assam

-          Shah Alam Khan

On the chars, the river islands of the Brahmaputra in Assam, a snapshot of what life in 'new India' looks like.


Sunday, May 26, 2019

चुनाव नतीजों के बाद: कुछ फुटकर बातें

 -अंजलि सिन्हा

नरेंद्र मोदी दुबारा भारत के प्रधानमंत्राी बनने जा रहे हैं।

यह पहली बार है कि कोई गैरकांग्रेसी सरकार दुबारा सत्ता में आयी है। किसानों के व्यापक असन्तोष, बेरोजगारी की अभूतपूर्व समस्या, बढ़ती महंगाई, अर्थव्यवस्था के संचालन को लेकर विगत सरकार की नाकामियों आदि के चलते जहां विपक्षी पार्टियों को यह लगने लगा था कि इस बार भाजपा 2014 के अपने आंकड़ों को दोहरा नहीं पाएगी, यह उसका आकलन गलत साबित हुआ है।

भाजपा के संकीर्ण नज़रिये एवं व्यवहार को देखते हुए आने वाले पांच साल की यात्रा को लेकर शंकाएं बनना लाजिमी हैं, लेकिन यहां हम भाजपा पर नहीं कांग्रेस से लेकर विपक्ष की धाराओं पर, महिलाओं की मानसिकता आदि पर बात कर रहे हैं।

Tuesday, March 26, 2019

अधिकार के लिए संघर्ष की मिसाल रकमा बाई (1864 - 1955)




विवाह और व्यक्तिगत संबंधों में चुनाव के अधिकार को लेकर लड़नेवाली रकमाबाई हमारे लिए एक प्रेरणा स्त्रोत है। रकमा के पिता का देहांत जब वो दो साल की थी तभी हो गया था। छः वर्ष पश्चात्, उनकी 23 वर्षीय मां जयंती बाई का दूसरा विवाह डॉ साखाराम अर्जुन के साथ कर दिया गया।  चूंकि डॉ अर्जुन सामाजिक और धार्मिक सुधारकों की संगत में रहते थे, इसलिए रकमा  को घर पर प्रोत्साहनशाली वातावरण मिला।